खोज रौशनी की
शामें जब उदास होने लगे
मन भी हताश होने लगे
कहीं दूर तक न दिखे जब कोई रास्ता
तू खोज कर रौशनी की
जब रातें स्याह होने लगे
चाँद भी कहीं खोने लगे
सुबह भी दूर होने लगे
कहीं दूर तक न दिखे जब कोई रास्ता
तू खोज कर रौशनी की
हिम्मत कमजोर होने लगे
सब्र का बांध भी टूटने लगे
मन का पंछी घरौंदो को लौटने लगे
आशाओं से नाता टूटने लगे
तू हार मत मान, बस ढूंढ इक नया रास्ता
तू खोज कर रौशनी की
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