अंधविश्वास का विज्ञान
धर्म,धर्म का अर्थ और उससे जुड़े अंधविश्वास हमेशा से ही सभी के लिए प्रश्न बने रहे है जिसमें विज्ञान का अपना अहम किरदार है। विज्ञान उस प्रतिद्वंद्वी की तरह है जो धर्म से हमेशा ही होड़ लगाये रहता है। उसका अपना फायदा भी है लोगों को सच का पता भी चलता है। वैसे ये मैं कहूँ कि हमारे पूर्वजों को विज्ञान की जो समझ थी वो आज की पीढ़ी को भी नहीं है। इसको कुछ उदाहरण से देखते है, जैसे सूर्य और चन्द्र ग्रहण के समय घर से बाहर न निकलने की हिदायत दी जाती है उसका अपना वैज्ञानिक कारण है कि ग्रहण के दौरान बहुत से रेडिएशन होते है जो शरीर के लिए हानिकारक होते है जो कि अब सभी लोग ही जानते है, परन्तु प्राचीन काल में इसके जानकार लोग अपनी बात को समझाने के लिए ईश्वर का सहारा लेते थे क्यूंकि लोगों में शिक्षा का अभाव था। ऐसे लोगों को अच्छी बात समझाने के लिए झूठ का सहारा लेना पड़ता है और वही से अंधविश्वास का आरंभ भी हो जाता है। यह बिलकुल वैसा ही है जैसे हम किसी अबोध बालक को डराते है आग से, जीव जंतुओं से, क्यूंकि वो अनभिज्ञ होते है उनके खतरों से।
एक और उदाहरण है वृक्षों और नदियों की पूजा और उनमें देवी देवताओं का वास होना। अगर लोगों को उनके वैज्ञानिक महत्व को समझाया जाता तो शायद वो न समझ पाते तो उस समय के वैज्ञानिकों नें लोगों को प्रकृति की पूजा करने को कहा जिससे वह वृक्षों को न काटे और नदियों को प्रदूषित न करें। और यह तरीका बहुत ही कारगर साबित हुआ।परन्तु जैसे ही हमें ज्ञान आया हम उन अज्ञानियों से भी बुरा कृत करने लगे। अब लोग इन सब को अंधविश्वास कहते है परन्तु उसके पीछे के विज्ञान को नहीं समझते। मैं यह नहीं कहता किसी भी परंपरा को मानो या पालन करो पर उसके पीछे के विज्ञान को जरूर जानो। अंधविश्वास का विज्ञान जितना गूढ़ है उतना ही छिछला बस अपने मन बुद्धि को खोलकर समझने की जरूरत है। विज्ञान का अर्थ ही है किसी भी विषय का विशेष ज्ञान, तो किसी भी चीज को गलत कहना बिना उसके पीछे के विज्ञान को जानें ज्ञानियों का काम नहीं है
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