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Showing posts from June, 2017

अंधविश्वास का विज्ञान

धर्म,धर्म का अर्थ और उससे जुड़े अंधविश्वास हमेशा से ही सभी के लिए प्रश्न बने रहे है जिसमें विज्ञान का अपना अहम किरदार है। विज्ञान उस प्रतिद्वंद्वी की तरह है जो धर्म से हमेश...

खोज रौशनी की

शामें जब उदास होने लगे मन भी हताश होने लगे कहीं दूर तक न दिखे जब कोई रास्ता तू खोज कर रौशनी की जब रातें स्याह होने लगे चाँद भी कहीं खोने लगे सुबह भी दूर होने लगे कहीं दूर तक न दि...

भारत की सैन्य ताकत

Indian army भारतीय सेना, विश्व की तीसरी सबसे बड़ी वीरों की फौज, जिसकी क्षमता पर संदेह करना उसी प्रकार से हास्यास्पद है जैसे सूर्य को टाॅर्च दिखाना। उनका देश तथा मातृभूमि के लिए प्रेम ...

अधिकार

भारतः एक ऐसा देश जहाँ का लोकतंत्र सबसे बड़ा और नागरिकों को जितने अधिकार मिले है शायद ही कोई और देश  दे पाएगा। जब अधिकार मिलते है तो उसके साथ ही आती है बड़ी जिम्मेदारियाँ। अब ये...

शहीद का घर

आज गाँव में पसरा था सन्नाटा शोर तो इक घर में था आंगन में भीड़ जमा थी बीच में था कोई लेटा वो था नहीं और कोई, वो था भारत का बेटा खाकर गोली छाती पर प्राण थे उसने त्याग दिये कायर नहीं ...

समय: इक सोच

कहते है समय से बड़ा कोई गुरू नहीं होता सही भी है, समय ही है जो अच्छे बुरे की पहचान करने की सीख देता है चाहे व्यक्ति हो या वस्तु। समय ही बताता है कि इस लोगों से भरी दुनिया में हम सब ...

महादेव की अजब बारात

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काल विकराल क्या औघड़ रूप बनाये हो  आँखें है लाल और ऊपर से भांग भी चढाये हो  भैरों द्वारे ठाड़े प्रेतन की सेना लै,     नंदी को भी आज युद्ध के खातिर सजाये हो त्रिशूलन को धार दै दै भृंगी श्रृंगी सज्ज खड़े काली के खाली खप्पर से आज मृत्यु को डराये हो  हे महाकाल आज काहे इतनो गुस्साये हो      अरे चूक हुई हमसे नारद के गान से लागत है कुछ और ही  युद्ध नहीं, कही और ही आज कदम बढ़ाये हो राजा हिमाचल द्वारे बाजत शहनाई है  लागत कोई शुभ घड़ी आयी हो  हम अज्ञानी ऐसे तुम्हरी बारात को सेना समझ गये का करे तुम रूप ही ऐसा बनाये हो  दूल्हा तो तुम लागत नाही,  जयमाल नाही मुण्डमाल लटकाये हो भूतन प्रेतन से तुम्हरी यारी  तुम का जानौ दुनियादारी उन्हीं कै जैसे अपना भोला मुखड़ा सजाये हो गौरा महल की रहनवारी औ' तुम कैलाशी  समझ ही ना आवत काहे ब्याह रचाये हो अरे बुलाओ इन्द्र देवता का मेघन के संग ना जाने कब से नहीं नहाये हो दूल्हा के आभूषण लै लक्ष्मी द्वारै ठाड़ी  इन गणन का राह से काहे नाही हटाये हो  सरस्वती सोहर गा रही हर के आगे...

अपना परिचय करवा दिया जाये

चहचहाती चिड़ियों का शोर हूँ मैं कभी वर्षा कभी बादल घनघोर हूँ मैं मन की खुशी से नाचता मोर हूँ मैं पुराने जमाने से जुड़ा नया दौर हूँ मैं मैं तो बस मनमौजी अनसुलझा हूँ समझ न आऊँगा कुछ और हूँ मैं                                                          ~Suryansh