अपना परिचय करवा दिया जाये



चहचहाती चिड़ियों का शोर हूँ मैं
कभी वर्षा कभी बादल घनघोर हूँ मैं
मन की खुशी से नाचता मोर हूँ मैं
पुराने जमाने से जुड़ा नया दौर हूँ मैं
मैं तो बस मनमौजी अनसुलझा हूँ
समझ न आऊँगा कुछ और हूँ मैं



                                                         ~Suryansh 

Comments

Popular posts from this blog

अंधविश्वास का विज्ञान

खोज रौशनी की

समय: इक सोच