भारत की सैन्य ताकत
Indian army भारतीय सेना, विश्व की तीसरी सबसे बड़ी वीरों की फौज, जिसकी क्षमता पर संदेह करना उसी प्रकार से हास्यास्पद है जैसे सूर्य को टाॅर्च दिखाना। उनका देश तथा मातृभूमि के लिए प्रेम शब्दों में वर्णनीय नहीं हैं। उनको अपने माता पिता, परिवार, बच्चों से शायद इतना स्नेह नहीं होता अन्यथा उनको छोड़कर किसी वीरान, सुनसान जंगल, पहाड़ या रेगिस्तान जैसी जगहों पर कोई क्यूँ रहना पसन्द करेगा, जहाँ इंसान तो क्या पशु भी जाने से कतराते है। समझ के परे है कि कोई कैसे सारी सुख सुविधाओं का त्याग करके रह सकता है, यहाँ तो कुछ क्षणों के लिए अगर मोबाइल काम करना बंद कर दे तो हृदयाघात की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, कुछ देर के लिये बिजली कटौती हो जाये तो गर्मी से प्राण पखेरू उड़ने लगते है और ऐसा प्रतीत होता है कि अंत समय नजदीक आ गया परन्तु वो कैसे रेगिस्तान की 50 डिग्री की गर्मी में और पहाड़ की चोटियों पर जहाँ का तापमान सदैव उल्टा भागता है, अपना सेवाधर्म पूरी निष्ठा के साथ पालन करते है। कुछ खास तो होता होगा उनमें अन्यथा इतना साहस कैसे किसी में हो सकता है।
अगर आज की स्थिति की बात करें तो उनके लिए यह समस्याओं का दौर है जितना खतरा सामने से दिख रहे दुश्मन से है उससे कहीं ज्यादा घर में छिपे शेर की खाल पहनें भेड़ियों से है जो पीठ पर प्रहार करते है और देश में श्वेत धवल खादी वस्त्र पहनकर खाकी को अपना गुलाम समझते है। सैन्य जवानों द्वारा अपनी सुरक्षा के लिए उठाए कदमों की सराहना करने वालों की संख्या बहुत कम और निंदा करने वाले संख्या बहुल्य मात्रा में है। मानवाधिकार का झण्डा लेकर निकल पड़ेंगे सेना के खिलाफ, परन्तु यह नहीं जानते कि सेना के मनोबल पर क्या प्रभाव पड़ेगा और सेना अपने कदम यदि पीछे ले ले तो गीदड़ की मौत मरेंगे। भारत है ये जहाँ पर बन्धुत्व की बातें होती है और 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का नारा लगाया जाता है अन्यथा सैन्य बलों के लिए कोई मुश्किल काम नहीं है ऐसे इंसान के भेष में छिपे राक्षसों का अंत करना। माफ कीजिएगा मेरी भाषा असंवैधानिक हो सकती है परन्तु ऐसे अधम लोगों के लिए मुझे और कोई उपयुक्त संज्ञा नहीं मिली। मैं अपने देश के सीमा प्रहरी और हमारे रक्षकों को नमन करता हूँ और उनके त्याग बलिदान की भूरि भूरि प्रसंशा करता हूँ। मैं शायद और ज्यादा न कर पाऊँ परन्तु मैं अपने देश के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा से करने का प्रयास करूंगा ।
जय हिन्द जय भारत
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