Traffic week in lucknow

ज़रा गौर फरमायो भैया, आप लखनऊ मा हौं
बिना हेल्मेट घर से ना जायो, आगे पुलिस खड़ी है
लाइसेंस, कागज चेक कर लियो नहीं तो परेशानी बड़ी है
सीट बेल्ट बाँधना भी जरूरी है, नहीं तो बड़ी गड़बड़ी है

शासन का आदेश है भैया, मानना तो पड़ेगा
नहीं तो आपकी जान आफत में पड़ी है
हजरतगंज अमीनाबाद चौक हो या चारबाग
भैय्या अबतो पुलिस हर मोड़ पर खड़ी है

सौ की हरी पत्ती से भी काम न चलिहै, चालान होई
पुलिस वाले भी कुछ न करिहैं समस्या बहुत बड़ी है
हमतो आपका बताई दिये सतर्क रहो
विधायक चाचा काम न अईहैं, ये योगी की लाठी पड़ी है
सावधान रहो भैया,  आप लखनऊ मा हौं
 
हमारे शहर-ए-हाल कुछ ऐसे है कि हर मोड़ पर आपको पुलिस वाला मिल जायेगा उसको देखकर मन में एक ख्याल आता है कि कोई योध्दा क्रोधित मन से, एक हाथ में लठ्ठ रूपी शस्त्र और दूसरे हाथ में चालान रूपी चाबुक के साथ आक्रमण को सज्ज है। गलती तो उनकी भी नहीं है क्रोध आना स्वाभाविक है इतने दिनों बाद वो काम करना ही पड़ गया जिसकी सैलरी मिल रही थी, पर आदत तो है नहीं काम करने की और वैसे भी कोई काम करे भी क्यों, सैलरी तो अकांउट में आ ही जायेगी। शासन का आदेश तो ड्यूटी कर रहे है पहले १०० २०० लेकर काम हो जाता था अब वो भी सही से नहीं हो पा रहा है चालान करना ही पड़ रहा है टारगेट जो पूरा करना है। अच्छा ही है कुछ तो सुधार होगा शहर में, सतर्कता जरूरी है नियमों के लिये, तो हमारी बात पर ध्यान दें।......

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